नई दिल्ली। पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो ने भारत यात्रा पर आने से पहले एक वीडियो जारी किया है। जिसमें उन्होंने एससीओ की अहमियत बताई है। वे गोवा में होने वाली विदेश मंत्रियों की एससीओ (शंघाई सहयोग संगठन) समिट में हिस्सा लेंगे। गौरतलब है कि पाकिस्तान के किसी विदेश मंत्री की 12 साल में यह पहली यात्रा है। इससे पहले हिना रब्बानी जुलाई 2011 में शांतिवार्ता के लिए भारत दौरे पर आई थीं। अपनी यात्रा से पहले बिलावल भुट्टो ने एक वीडियो जारी किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि मेरा भारत जाना यह पैगाम देता है कि पाकिस्तान एससीओ को कितनी अहमियत देता है। बिलावल भुट्टो ने वीडियो में कहा, आज मैं गोवा, भारत जा रहा हूं। जहां मैं एससीओ में पाकिस्तान के डेलिगेशन का नेतृत्व करूंगा। मेरा जाना यह पैगाम देता है कि पाकिस्तान एससीओ को कितनी अहमियत देता है और अपनी सदस्यता को कितनी गंभीरता से लेता है। मेरी यात्रा के दौरान, जो विशेष रूप से एससीओ पर केंद्रित है, मैं पाकिस्तान के मित्र देशों के अपने समकक्षों के साथ रचनात्मक चर्चा की आशा करता हूं।
इधर भारत की ओर से साफ किया जा चुका है कि एससीओ समिट के इतर भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय वार्ता नहीं होगी। वहीं, पाकिस्तान की ओर से भी कहा गया है कि बिलावल भुट्टों की यात्रा के दौरान भारत के विदेश मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता नहीं करेंगे। हालांकि एससीओ के इतर बिलावल भुट्टों चीन और रूस के विदेश मंत्री के साथ बैठक कर सकते हैं। बिलावल गोवा में भारतीय मीडिया के सामने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सकते हैं। माना जा रहा है कि वे इस दौरान चीन राग अलाप सकते हैं। उधर, भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी एससीओ के इतर गोवा में चीन के विदेश मंत्री चिन गांग और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
गौरतलब है कि भारत ने प्रोटोकॉल के तहत एससीओ देशों के विदेश मंत्रियों को समिट में शामिल होने के लिए न्योता भेजा था। इन देशों में पाकिस्तान और चीन भी शामिल हैं। वैसे पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक बयान देने के बाद ऐसा माना जा रहा था कि बिलावल नहीं आएंगे, हालांकि उन्होंने समिट में शामिल होने का फैसला किया है। बिलावल जरदारी भुट्टो ने दिसंबर में न्यू यॉर्क में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पीएम मोदी पर विवादित टिप्पणी की थी। गोवा में होने वाली एससीओ समिट में रूस और चीन दोनों शामिल हो रहे हैं। ये दोनों देश आर्थिक संकट के दौर में पाकिस्तान के सबसे अहम सहयोगी हैं।