इन्सेफलाइटिस से पूर्वी यूपी में चालीस साल में 50 हजार बच्चों की मौत हुई थी। चार बार सपा को प्रदेश की सत्ता संभालने का मौका मिला था। 90 फीसदी मरने वाले बच्चे दलित, अल्पसंख्यक और अति पिछड़ी जाति के थे, क्या यहां पीडीए नहीं था। तब क्या कर रहे थे चार बार के आपके मुख्यमंत्री। और आपको तो पांच साल का मौका मिला था।
मुझे ये बताने में गर्व होता है कि हमारी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में इन्सेफेलाइटिस का समूल नाश कर दिया। आज आप जाइए गोरखपुर, महाराजगंज, कुशीनगर, देवरिया, सिद्धार्थनगर, संत कबीर नगर, बस्ती, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, गोंडा, पीलीभीत, लखीमपुर और सहारनपुर तक इंसेफेलाइटिस समाप्त हो चुका है। बस घोषणा होना बाकी है।
आज सरकारी अस्पताल में मरीज इसलिए आ रहा है कि उसे दवाएं मिल रही हैं और डॉक्टर मिल रहा है। आपके समय में न दवा थी, न डॉक्टर थे। अपनी विफलता को छिपाने के लिए आपको वहां किसी गरीब का आना और उसे आयुष्मान भारत सुविधा के अंतर्गत 5 लाख की बीमा की सुविधा मिलना बुरा लगता है।
प्रदेश के अंदर 10 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत की सुविधा मिल रही है वो आपके लिए जाति हो सकती है, वोट बैंक का मुद्दा हो सकता है। हमारे लिए यूपी का नागरिक परिवार का हिस्सा है। हमें विरासत में जर्जर व्यवस्था मिली थी, उसे सुधारने में वक्त जरूर लगेगा मगर वहां उमड़ती भीड़ ये बताती है लोगों का इस व्यवस्था में विश्वास भी बढ़ा है। वहां पहले से सुविधा बेहतर हुई है। पब्लिक को आपमें विश्वास ही नहीं था इसलिए आपको नकार दिया।
ये सरकार पहली सरकार है जिसने अन्नदाता किसानों के हित में दो अन्य महत्वपूर्ण कदम उठाए थे। हमने अपने पहले कार्यकाल में वन्य जीव और मानव संघर्ष को आपदा की श्रेणी में लाने का काम किया।
कोई व्यक्ति सर्पदंश और सांड़ से मरे, इन सभी को आपदा में घोषित करने वाला यूपी देश का पहला राज्य है। हम तो सांड़ की नंदी के रूप में पूजा करते हैं। शिवपाल जी आप नहीं करते क्याय़ तो कुछ तो समझाया करें इन्हें।
बिजनौर के किसानों की चर्चा नेता विरोधी दल कर रहे थे, आपको पता होना चाहिए कि 20 तेंदुओं को वहां से निकाला गया है और रेस्क्यू टीमें वहां लगातार कैंप कर रही हैं। हम किसान को सुरक्षित रखेंगे, साथ ही वन्यजीवों को रेस्क्यू करके सुरक्षित करने का कार्य भी करेंगे।
नेता विरोधी दल से पूछना चाहता हूं कि पीएम आवास योजना से लाभान्वित 55 लाख लोग पीडीए के पार्ट नहीं हैं क्या? क्यों नहीं अबतक इन्हें आवास मिला था, क्योंकि वो दलित और गरीब थे। 2017 से अबतक 55 लाख लोगों को आवास दिलाये गये हैं।
लोहिया आवास में आप सपा के कैडर को आवास देते थे। सपा कार्यालय ये तय करता था कि किसको आवास मिलना है। जब पीएम आवास की घोषणा हुई, तब केंद्र में कांग्रेस और प्रदेश में सपा की सरकार थी, उस वक्त की सूची को हमने स्वीकार करते हुए सभी को मकान देने का कार्य किया है।
जब मोदी जी की सरकार आई तब भारत सरकार कहती थी कि आवास लीजिए और ये कहते थे कि दलित हमारा वोट बैंक नहीं है। ये लोग आवास देते ही नहीं थे। लगभग ढाई वर्ष तक ये सरकार में रहे। 2017 में जब हमारी सरकार आई उसके बाद 55 लाख गरीबों को आवास दिया गया है, जिसमें से 44 लाख से अधिक आवास में गृह प्रवेश भी हो चुका है।
डबल इंजन सरकार ने एक और काम किया है। प्रयागराज में एक भूमाफिया की जमीन को मुक्त कराके 76 गरीबों को वहां भी आवास देने का कार्य किया गया है।
सीएम योगी-
2012 से 17 के बीच प्रदेश की जनता चाचा भतीजे के बीच द्वंद्व का शिकार होती रही। भतीजे को लगता था कि चाचा हावी ना हो जाएं, इसलिए पैसे नहीं देते थे। यही कारण है कि 2012 से 17 के बीच आठ परियोजनाएं पूरी हो पाई थीं। 2017 से 22 के बीच हमने 20 परियोजनाओं को पूरा किया है। सिंचन क्षमता 2012 से 17 तक 195900 हेक्टेयर थी और 2017 से 22 के बीच 2317000 हेक्टेयर सिंचाई हुई है, जिससे 44 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं।
पहली बार गत वर्ष हमने बिजली के बिल में 50 फीसदी की छूट दी है। तब क्या कर रहे थे आप लोग। आपने कुछ नहीं किया और कुछ करना भी नहीं चाहते थे। 2023 24 के लिए हम फीडर को अलग कर रहे हैं। 1500 करोड़ का बजट इसके लिए प्रावधान कर चुके हैं। जिससे प्राइवेट नलकूप लगाने वाले किसानों को फ्री में बिजली उपलब्ध करा सकें।
नलकूपों को सोलराइज करने की कार्रवाई हुई है। अबतक 45342 किसानों को इससे आच्छादित किया है। 2023-24 में 30 हजार किसानों को जोड़ने का लक्ष्य है। प्रदेश में टेल तक पानी पहुंचाने का कार्य बहुत अच्छे ढंग से आगे बढ़ा है। पीएम कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत 23 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की सिचाई करने की योजना इसी का एक महत्वपूर्ण पहलू है।
प्रदेश में अलग-अलग विभाग की ओर से भी 30 हजार 642 तालाब और 1546 चेकडैम बनाये गये हैं। 13 हजार से ज्यादा अमृत सरोवर बनाने का कार्य हुआ है। 34974 रेन वाटर हार्वेस्टिंग का कार्य हुआ है। 30749 रियूज एंड रिचार्ज स्ट्रक्चर बनाने का कार्य हुआ है। विभिन्न जनपदों में 9 नदियों को पुनर्जीवित किया गया है और 66 के साथ ये कार्य किया जा रहा है। भूगर्भीय जल के स्तर को ऊपर उठाने का कार्य किया जा रहा है।
मुझे आश्चर्य होता है,नेता विरोधी दल मुख्यमंत्री भी रहे है,प्रदेश की उपलब्धियों पर गर्व होना चाहिए,आप भी इसका हिस्सा रहे है
मुझे गर्व है इस विधानसभा ने सस्टनेबल गोल पर हमने 36 घंटे चर्चा की,लेकिन विपक्ष गायब रहा,लेकिन चचा मौजूद रहे उनको सद्बुद्धि थी…
सीएम योगी-
2017 से पहले बिजली वीआईपी जिलों में ही मिलती थी। शेष जिले इससे वंचित होते थे। आज यूपी में सभी जिलों में समान रूप से बिजली आपूर्ति की जा रही है। जिला मुख्यालय पर 23 से 24 घंटे, तहसील पर 20 से 22 घंटे और ग्रामीण इलाकों में 16 से 18 घंटे की आपूर्ति 2017 से लगातार की जा रही है।
1 लाख 29 हजार मजरों का विद्युतिकरण किया गया। 33 केवीए के 1528 सब स्टेशन बनाये गये। एक करोड़ 58 लाख घरों को फ्री बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराये गये। 399800 से अधिक किसानों को निजी नलकूपों के कनेक्शन दिये गये। 2015-16 में पीक आवर 12300 मेगावाट की डिमांड होती थी, आज 28284 मेगावाट की डिमांड है। ये दिखाता है कि पिछली सरकार के पास केवल व्यक्तिगत एजेंडा था, विकास का कोई एजेंडा नहीं था।
इसके अलावा हमारी सरकार द्वारा पॉवर सप्लाई लॉस को भी काफी कम किया गया। 2017 से पहले ये 22 फीसदी था, आज ये 17 फीसदी के आसपास है। ये रिफॉर्म को दिखाता है। 2017 से पहले 1 करोड़ 8 लाख विद्युत मीटर थे, आज 3 करोड़ 27 लाख से अधिक विद्युत मीटर लगाये गये हैं।
विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में 12 से 17 के बीच में 4839 मेगावाट की विद्युत उत्पादन की क्षमता थी जो अब बढ़कर 5820 मेगावाट की हो गई है। इसके अलावा 1600 मेगावाट के ओबरा तापीय परियोजना को आगे बढ़ाने की कार्रवाई को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। ये योजनाएं प्रदेश की आने वाली आवश्यक्ताओं की पूर्ति करने का कार्य करेंगी।
